उत्तराखंड के ऋषिकेश में स्थित आई डी पी एल कॉम्पलेक्स में जी एस प्रोजेक्शन, एम एच ए और भूतल सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के तहत उत्तराखंड राज्य में सड़क ढाँचे के निर्माण हेतु तेजी से विकास के लिए 25 फरवरी 2009 में शिवालिक परियोजना की स्थापना की गई । परियोजना द्वारा 346.24 किमी0 तक सड़क का जी एस कार्य, 647.80 किमी0 तक राष्ट्रीय राजमार्ग, 37.45 किमी0 तक एम एच ए सड़क तथा 16.21 किमी0 तक डिपोजिट कार्य के विकास तथा रखरखाव का काम किया जा रहा है । परियोजना के पास 21 सी00कृ00 और 36 सी00 कृ00 क्रमशः जोशीमठ और हर्शिल सेक्टरों की देखभाल हेतु दो कृतिक बल हैं । बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री तथा यमुनोत्री चार धामकी ओर जाने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग की देखभाल करना परियोजना के अतिविशिष्ट और गौरवशाली कार्य हैं । इस परियोजना का नारा जय बद्री विशालहै ।

 

उत्तरकाशी जिले में 03/04 अगस्त 2012 को बादल फटने के कारण सड़क और पुलों को भारी नुकसान हुआ जिससे धरासू-गंगोत्री (राष्ट्रीय राजमार्ग-108) पर संचार साधन क्षतिग्रस्त हो गया और गंगोत्री यात्रा पर पूर्णतः विराम लग गया । इस प्राकृतिक आपदा से बहुत से भक्तगण असहाय हो  गए ।

 

प्रकृति के क्रोध से आयी इस तबाही के कारण उत्तरकाशी, उत्तराखंड राज्य से पूर्णतः अलग-थलग हो गया । उत्तरकाशी जिले में इस विध्वंस के कारण कीमती जान-माल की हानि के रूप में भारी विनाश हुआ ।

 

शिवालिक परियोजना तथा अधीनस्थ इकाइयों द्वारा 190 फीट डी डी आर बी बी और 100 फीट टी एस पुनर्स्थापना का कार्य युद्धस्तर पर शुरू किया गया । इस ऑपरेशन के दौरान स्वारीगाद बेली ब्रिज को लांच करते समय कैप्टन ए राहुल रमेश शहीद हो गए और कुछ अन्य ग्रेफ कार्मिकों को चोटें आई । फिर भी सैन्य दल का मनोबल ऊँचा रहा और निर्धारित समय-सीमा में पुनर्स्थापना का कार्य पूरा किया गया ।


13 सितंबर 2012 को पुनः रूद्रप्रयाग जिले के ऊखीमठ में अचानक बादल फटने से जान-माल का भारी नुकसान हुआ और प्रदेश में सड़कों का जाल भी क्षतिग्रस्त हो गया । पी डब्ल्यू डी सड़कों के नुकसान के अलावा शिवालिक परियोजना के क्षेत्राधिकार (ए ओ आर) के तहत रूद्रप्रयाग-गौरीकुंड राष्ट्रीय राजमार्ग-109 (नया राष्ट्रीय राजमार्ग-107) पर 32.00 से 51.00 किमी0 तक के बीच 14 स्थानों पर भारी नुकसान हुआ । डोजर, जे सी बी और ग्रेफ कार्मिकों/नैमित्तिक मजदूरों ने मलबे को हटाने और यातायात को आवागमन हेतु बहाल करने के लिए दिन-रात काम किया । 15 सितंबर 2012 में रूद्रप्रयाग, गौरीकुंड मार्ग को यातायात के लायक बना दिया गया ।

 

171 एफसीपी/72 0नि0कं0/36 सी00कृ00 के कैप्टन ए राहुल रमेश को 26 जनवरी 2013 को शौर्य चक्र(मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया । 

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